इन हवाओं को न घबराहट होती है,
किसी अनजान चौराहे से गुज़रने में,
न कोई गम होता है इन्हें,
किसी से टकराकर अपना वेग खो देने में ।
तपता सूरज न सोचता,
की अपने गर्माहट को बचा ले,
बाँट देता है अपनी सारी रौशनी,
दुनिया को अँधेरे से बचाने ।
इन पेड़ों को तो ज़रा देखो,
क्या कुछ गवा नहीं देते जीवन भर में,
फिर भी फल, छाँव में न कमी करते,
जब तक रहता है हरियाली इनमें ।
ऐ इंसान तू न गम कर कभी
खो जाने दे तू खुद को भी
तेरा खोया हुआ कल किसी और को मिलेगा
पर खोयेगी न इंसानियत कभी !!!

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2 Comments
Nice message from a poet.
ReplyDeleteThanks😊
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