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खो देने का डर कैसा








इन हवाओं को न घबराहट होती है, 

किसी अनजान चौराहे से गुज़रने में, 

न कोई गम होता है इन्हें, 

किसी से टकराकर अपना वेग खो देने में ।


तपता सूरज न सोचता, 

की अपने गर्माहट को बचा ले, 

बाँट देता है अपनी सारी रौशनी, 

दुनिया को अँधेरे से बचाने 


इन पेड़ों को तो ज़रा देखो, 

क्या कुछ गवा नहीं देते जीवन भर में, 

फिर भी फल, छाँव में न कमी करते, 

जब तक रहता है हरियाली इनमें ।


ऐ इंसान तू न गम कर कभी 

खो जाने दे तू खुद को भी 

तेरा खोया हुआ कल किसी और को मिलेगा 

पर खोयेगी न इंसानियत कभी !!!

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